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Diwali Paragraph In Hindi Free Essays

Essays on diwali in hindi

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Short Essay on Diwali in Hindi in 250 Words: दीपावली पर निबंधविद्यार्थियों के लिए दीपों के उत्सव दीपावली पर निबंध प्रस्तुत है| दिवाली का त्यौहार हमारी हिन्दू संस्कृति का सबसे बड़ा महोत्सव है| दीपावली दीपों का वह पर्व है जो लोगों के जीवन में सुख, खुशहाली और समृद्धि लाता है| सत्य की विजय का यह पर्व स्मरण कराता है कि असत्य कितना भी बलवान क्यों ना हो लेकिन विजय हमेशा सत्य की ही होती है| दिवाली का उत्सव हिंदू धर्म में कई युगों से मनाया जाता रहा है|दीपावली दो शब्दों के मेल से बना है – दीप आवली, जहाँ दीप का अर्थ दीया अथवा ज्योति से है और आवली का अर्थ होता है पंक्ति अथवा कतार, तो इस प्रकार दीपावली का शाब्दिक अर्थ होता है “दीपों की पंक्ति या दीपों की कतार”दिवाली भारत के सबसे प्रमुख सामाजिक उत्सव है जो लोगों को सुख और समृद्धि की ओर ले जाता है और सबसे दिलों से बुराई और दुःख रूपी अंधकार को दूर करता है|दीपावली का पर्व प्रतिवर्ष शरद ऋतु में कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है| यह पर्व कृषि के दृष्टिकोण से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है| नई फसलों का आरम्भ होता है जिसे लोग उत्सव की तरह मानते हैं| दिवाली का पर्व हमेशा अक्टूबर या नवम्बर के महीने में ही मनाया जाता है| 2017 में 19 अक्टूबर को दिवाली का पर्व मनाया जायेगा|दिवाली का वर्णन हमारे स्कन्द पुराण और पद्मपुराण में भी मिलता है| स्कंदपुराण में ज्वलित दीप को सूर्य का प्रतिनिधि माना गया है| जिस प्रकार सूर्य अपने प्रकाश और ऊर्जा से समस्त संसार को जीवन प्रदान करता है वैसे ही दीप की ज्योति को जीवन का रूप माना गया है|दीपावली के उत्सव की लोकप्रियता इसी बात से देखी जा सकती है कि यह सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु विश्व के कई देशों में प्रमुख त्यौहार के रूप में मनाया जाता है|दीवाली भारत के अलावा सिंगापुर, मलेशिया, पाकिस्तान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, सूरीनाम, श्रीलंका, त्रिनिदाद, म्यांमार, गुयाना, मारीशस, टोबैगो और फिजी देश में भी मनाया जाता है| कुछ देशों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी होता है|प्रकाश का यह महोत्सव केवल एक त्यौहार ही नहीं है बल्कि यह हमारी संस्कृति और हमारे संस्कारों को भी दर्शाता है| दीपावली के पर्व का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है| दीपों का यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि अंधकार कितना भी घना क्यों ना हो लेकिन प्रकाश का एक छोटा दीपक भी अंधकार का सर्वनाश कर सकता है|* दिवाली का पर्व हमें सिखाता है कि असत्य बलशाली होने के बावजूद भी सत्य के आगे कमजोर साबित होता है| * दिवाली का पर्व हमें सिखाता है कि बुराई कितने भी पाँव जमा ले लेकिन उसका अंत एकदिन जरूर होता है| * दिवाली का पर्व हमें सिखाता है कि अधर्म कितना भी कुटिल क्यों ना हो लेकिन विजय हमेशा धर्म की ही होती है|दिवाली मात्र एक पर्व नहीं है बल्कि यह एक शिक्षा है जो हमारी संस्कृति की नींव को मजबूत बनाती है और लोगों के हृदय में सत्य की स्थापना करती है| इसके साथ ही साथ दिवाली के पर्व का महत्व इसलिए भी अधिक है कि इस दिन सभी लोग अपने घर, दुकान, ऑफिस आदि सभी जगह की सफाई करते हैं तो इससे मच्छर और गंदे विषाणुओं का नाश होता है जिस कारण हम बिमारियों से भी बचते हैं|दिवाली कर पर्व धन और समृद्धि के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है| इस दिन सभी लोग अपने घरों में धन की देवी माँ लक्ष्मी का पूजन करते हैं| ऐसा माना जाता है कि दिवाली में माँ लक्ष्मी के पूजन से धन और समृद्धि का वास होता है|दिवाली का पर्व सामाजिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि इस पर्व को सभी धर्म के लोग मनाते हैं – “हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई” सभी इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं इसलिए सामाजिक शांति और सौहार्द की भावना की वजह से भी यह त्यौहार महत्वपूर्ण है|दिवाली का त्यौहार हिन्दू धर्म में कई युगों से मनाया जाता है| इस पर्व को मनाने के पीछे भगवान राम और राक्षसराज रावण की कथा प्रचलित है|राक्षसराज रावण लंका का राजा था| रावण महापंडित और कई वेदों का ज्ञाता था तथा भगवान् शिव का परम भक्त था| रावण के दस सिर थे इसलिए उसे दशानन भी कहा जाता है| रावण को अपनी शक्ति पर बहुत घमंड था| उसने अपनी बहन सूपर्णखां के अपमान का बदला देने के लिए भगवान् श्री राम की पत्नी माता सीता का अपहरण कर लिया था|भगवान् राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण, देवी सीता का पता ढूंढते हुए वन- वन भटक रहे थे| उस समय शबरी नाम की वृद्ध महिला ने उनको सुग्रीव के बारे में बताया| श्री राम जब सुग्रीव से मित्रता करने पहुंचे तब उनकी मुलाकात वीर हनुमान से हुई|पवन पुत्र हनुमान, महाबलशाली और भगवान् राम के परम भक्त थे| वीर हनुमान ने एक ही छलांग में सात समुन्दर लांघकर लंका में प्रवेश किया और माता सीता का पता लगाया| तब भगवान् राम ने लंका पर चढ़ाई आरम्भ कर दी| सुग्रीव की वानर सेना के साथ मिलकर राम और लक्ष्मण ने रावण के कई राक्षसों का वध किया जिनमें मेघनाद, कुम्भकर्ण, अतिकाय प्रमुख थे|अंत में रावण स्वयं श्री राम से युद्ध करने आया| भगवान् राम से कई बार रावण का सिर काटा लेकिन रावण नहीं मरा क्यूंकि उसे भगवान् शिव से वरदान प्राप्त था| तब विभीषण ने श्री राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हो सकती| तब श्री राम ने रावण की नाभि पर तीर चलाया और रावण को मार गिराया और माता सीता को लंका से आजाद कराया|कार्तिक मास की अमावस्या के दिन भगवान् राम जब माता सीता सहित अयोध्या वापस आये तो अयोध्या की प्रजा में उत्सव का माहौल बन गया| पूरी प्रजा ने अपने घरों की सफाई की और अपने घरों में घी के दीये जलाये जिससे अमावस की रात्रि में भी पूरी अयोध्या नगरी प्रकाश से भर उठी| चारों ओर हर्ष और उल्लास माहौल था|उसी समय से प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को पूरे भारत में दिवाली का पर्व मनाया जाता है और सभी लोग दीये जलाकर भगवान् राम का स्वागत करते हैं|भारत त्यौहारों का देश है लेकिन जितनी खुशियां दिवाली का त्यौहार लेकर आता है उतनी कोई और त्यौहार नहीं लाता| दिवाली से कुछ दिन पहले से ही मार्किट में काफी चहल पहल दिखनी शुरू हो जाती है| सब जगह रौनक दिखाई देती है|मिठाई की दुकानें सजने लगती हैं, जगह-जगह पटाखों और फुलझड़ियों की दुकानें दिखती हैं, लोग देवी देवताओं की तस्वीरें और कैलेंडर खरीदते हैं| सब ओर माहौल एकदम खुशनुमा हो जाता है| परदेस में काम करने वाले लोग भी अपने घरों पर वापस आने लगते हैं और स्कूलों में भी बच्चों की छुट्टियां हो जाती हैं|दिवाली से पहले सभी लोग अपने-अपने घर, ऑफिस सब जगह सफाई करते हैं| घरों की मरम्मत कराते हैं, रंगाई पुताई का कार्यक्रम भी इन दिनों जोरों से चलता है| जिन लोगों के मकान कच्चे हैं वो मिटटी और गाय के गोबर से घर की लिपाई करते हैं और जिनके पक्के मकान हैं वो कलई और चूने से घर की पुताई करते हैं|लोग अपने घरों को आकर्षक रूप से सजाते हैं| दिवाली के दिन सभी लोग नए कपडे पहनते हैं और बाजार से पटाखे, फुलझड़ी और मिठाइयां खरीद कर लाते हैं| लोग अपने सगे सम्बन्धियों में मिठाई बांटते हैं और गले मिलकर दिवाली की शुभकामनायें देते हैं| इस दिन लोग सब द्वेष भावना को भूलकर दुश्मन को भी गले लगा लेते हैं|दिवाली पर सबसे ज्यादा आनंद बच्चों को आता है| बच्चे दिन भर मस्ती करते हैं, नए कपडे पहनते हैं और पटाखे चलाते हैं| मार्किट में कई प्रकार के सुन्दर पटाखे आने लगे हैं जिनसे बच्चों का बहुत मनोरंजन होता है|शाम को सभी लोग दिवाली पूजन करते हैं| दिवाली पूजा के समय पूरा परिवार एक जगह इकठ्ठा होता है और मंदिर में लक्ष्मी गणेश की मूर्ति या तस्वीर लगाते हैं| लक्ष्मी गणेश की पूजा से दिवाली पूजन आरम्भ किया जाता है| लोग आरती गाते हैं और सम्पूर्ण जगत के लिए मंगल कामना करते हैं|सभी लोग अपने घरों में दीये जलाते हैं| दिवाली के दिन घर के एक भी कोने में अँधेरा नहीं रहता, हर ओर दीये जलाकर प्रकाश किया जाता है| लोग अपने घरों के सामने और दीवारों पर भी दीये जलाते हैं| यह दृश्य इतना मोहक होता है कि पूरे संसार में ऐसा नजारा कहीं देखने को ना मिलेगा| चारों ओर, हर जगह दीप ही दीप दिखाई देते हैं और दीपों की ज्योति से पूरा देश जगमगा उठता है|अब लोग फुलझड़ी और पटाखे चलाते हैं| इस दिन पूरा आसमान रंगबिरंगा हो जाता है, चारों ओर पटाखों का चमकीला प्रकाश दिखाई देता है, यह नजारा देखते ही बनता है| लोग पूजा के बाद मिठाइयां खाते हैं और पूरे हर्षोल्लास के साथ दिवाली मनाते हैं|इस प्रकार दिवाली का पर्व मनाया जाता है| दिवाली का पर्व लोगों को अपनों के करीब लाता है और सामाजिक शांति और सदभावना की स्थापना करता है|एक निवेदन : मित्रों दिवाली पर इस निबंध के माध्यम से हम समाज में यह जागरूकता फैलाना चाहते हैं कि दिवाली खुशियों का पर्व है| इस दिन मिठाइयां खाइये और बुराइयों को अपने अंदर से निकालिये और आपसे निवेदन है कि पटाखे कम से कम चलायें क्यूंकि पटाखों की वजह पर्यावरण को बहुत क्षति होती है और वातावरण में जहरीली गैसें फ़ैल जाती हैं| इसलिए इस दिवाली पर पटाखे ना चलायें, खुशियां बाटें और आनंद उठायें|मित्रों दिवाली का यह विस्तृत निबंध आपको कैसा लगा, ये आप हमको कमेंट करके भी बता सकते हैं| छात्र इस दिवाली के निबंध (Diwali Essay in Hindi) को अपने पाठ्यक्रम या किसी कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल भी कर सकते हैं| हिंदीसोच की ओर से आप सभी को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें।। धन्यवाद!!

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Diwali Essay in Hindi -

Essays on diwali in hindi

Essay on Diwali in Hindi Language. भूमिका- भारत देश त्योहारों का देश है । ये त्योहार जीवन और जाति में प्राणों का संचार करते हैं । ये हमारे लिए प्रेरक शक्ति लेकर आते हैं । ये हमारे सांस्कृतिक परम्परा, धार्मिक भावना, राष्ट्रीयता, सामाजिकता तथा एकता की कड़ी के समान हैं । प्रत्येक त्योहार की अपनी- अपनी विशेषताएं हैं । त्योहार हमारे नीरस जीवन को आनन्द और उमंग से भर देते हैं । भारत के पर्व किसी-न-किसी सांस्कृतिक अथवा सामाजिक परम्परा के प्रत्येक रूप में स्मरण किये जाते हैं । ये हमारी आस्तिकता और आस्था के भी प्रतीक हैं । दीवाली भी भारत का एक सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय पर्व है । यह पर्व अन्य पर्वों में प्रमुख है ‘ ।, जगमगाते दीपों का त्योहार सब के आकर्षण का केन्द्र बनकर आता है । इस पर्व के आने से पूर्व लोग घरों, मकानों और दुकानों की सफाई करते हैं । प्रत्येक वस्तु में नई शोभा आ जाती हैं । सब पर्वों का सम्राट् यह पर्व सर्वत्र आनन्द और हर्ष की लहर बहा देता है ।दीवाली से सम्बद्ध कहानियां- दीवाली के इस मधुर पर्व के साथ अनेक प्रकार की कहानियां जुड़ी हैं । इन कथाओं में सबसे प्रमुख कहानी भगवान् राम की है । इस दिन श्री रामचन्द्र जी अत्याचारी और अनाचारी रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे । अयोध्यावासी अपने मनचाहे प्रिय तथा श्रेष्ठ शासक राम को पाकर गदगद हो गए । उन्होंने उनके लौटने की खुशी में दीप जलाए । ये दीप अयोध्यावासियों की प्रसन्नता के परिचायक थे । तब से इस पर्व को मनाने की परम्परा चल पड़ी । कुछ कृष्ण भक्त इस पर्व का सम्बन्ध भगवान् कृष्ण से जोड़ते हैं । उनके- अनुसार इसी दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध कर उसके चंगुल से सोलह हजार रमणियों को मुक्त करवाया था । इस अत्याचारी शासक का संहार देख कर लोगों का मन मोर नाच उठा और उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए दीप जलाए ।एक पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन समुद्र का मंथन हुआ था । समुद्र से लक्ष्मी के प्रकट होने पर भी देवताओं ने उसकी अर्चना की । कुछ भक्तों का कथन है कि धनतेरस के दिन भगवान् विष्णु ने नरसिंह के रूप में प्रकट होकर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी । सिक्स धर्म को मानने वाले कहते हैं कि इसी दिन छटे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी ने जेल से मुक्ति पाई थी । महर्षि दयानन्द ने भी इसी दिन निर्वाण ( मोक्ष) प्राप्त किया था ।दीवाली से सम्बन्धित सभी कहानियां दीवाली नामक पर्व का महत्त्व बताती हैं । वास्तव मैं इस महान् पर्व के साथ जितनी भी कहानियां जोड़ी जाएं कम हैं । यह पर्व जन-जन का पर्व है । सभी धर्मों और सभी जातियों के लोग इसका समान रूप से आदर करते हैं ।महत्त्व- दीवाली स्वच्छता का भी प्रतीक है । छोटे-बड़े, धनी-निर्धन सब इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाते हैं । इस दिन की साज-सजा तथा शोभा का वर्णन करना सरल नहीं । बाजारों में रंग-बिरंगे खिलौनों की दुकानें सज जाती हैं । इस दिन बालकों का उत्साह अपने चरम पर दिखाई देता है । वे पटाखे चलाकर अपनी प्रसन्नता का परिचय देते हैं । मिठाई की दुकानों की सजावट दर्शनीय होती है । दीवाली की रात्रि का दृश्य अनुपम होता है । रंग-बिरंगे बच्चों की पंक्तियां सितारों से होड़ लगाती दिखाई देती हैं । आतिशबाजी के कारण वातावरण में गूंज भर जाती है । दीवाली अनेक दृष्टियों में महत्त्वपूर्ण पर्व है । व्यापारी लोग इस दिन को बड़ा शुभ मानते हैं । वे इस दिन अपनी बहियां बदलते हैं तथा नया व्यापार शुरू करते हैं । यह पर्व एकत्व का भी प्रतीक है । सभी धर्मो के लोग इस पर्व को समान निष्ठा के साथ मनाते है । मन : यह पर्व राष्ट्रीय एवं साँस्कृतिक एकता का भी साधन है । दीवाली के अवसर पर जो सफाई की जाती है, वह स्वास्थ्य के लिए! भी बड़ी लाभकारी होती है । क्योंकि इसके पूर्व वर्षा ऋतु के कारण घरों में दुर्गन्ध भर जाती है । वह क्या- इन दिनों सुगन्धि के रूप में बदल जाती है । दीवाली मनुष्य की वैमनस्य भावना को समाप्त कर एकता अपनाने की प्रेरणा देती है । मनुष्य कर्त्तव्य-पालन में सजगता का अनुभव करता है ।दुःख की बात है कि दीवाली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर: भी कुछ लोग जुआ खेलते तथा शगव पीने हैं । जो व्यक्ति श्र में हार जाता है, उसके लिए यह पर्व अभिशाप के समान है । ऐसे लोग दीवाली की उच्चलता पर कालिमा पोत कर नास्तिकता, कृतप्नता तथा अराष्ट्रीयता का परिचय देते हैं ।उपसंहार- दीवाली भारत का एक राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पर्व है । इसके महत्त्व को बनाये रखना आवश्यक है । जुआ खेलने और शराब पीने वालों का विरोध करें । तभी हम ऐसे पर्वों के प्रति श्रद्धा और आस्तिकता का परिचय दे सकते हैं । पर्व देश और जाति की सबसे बड़ी सम्पत्ति हैं । इनके महत्त्व को समझना तथा इसके आदर्शों का पालन करना चाहिए । प्रत्येक भारतवासी का यह परम कर्त्तव्य है कि वे इम महान पर्व को सामाजिक कुरीतियों से बचाए ।नीचे हमने आपके लिए एक और निबन्ध same topic यानि कि दीपावली पर दिया हुआ है. आपको जो भी अच्छा लगे आप पढ़ सकते हैं.भूमिका- भारत भूमि अपनी प्राकृतिक सुषमा के लिए संपूर्ण विश्व में अनूठी है और इसकी संस्कृति भी इसे गौरवान्वित करती है । समय-समय पर मनाए जाने वाले त्योहार इसकी संस्कृति की विशेषता को दर्शाते हैं । प्रत्येक त्योहार का अपना महत्त्व है । इन त्योहारों के कारण भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है । जीवन में त्योहार आवश्यक औषधि का कार्य करता है । जिस प्रकार शरीर को निरोग रखने के लिए पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए त्योहारों का होना भी आवश्यक है । मानव जीवन समस्याओं, उलझनों, दु:खों एवं समस्याओं से भरा है जिसमें मनुष्य पिसकर रह जाता है । जीवन को इससे उबारने के लिए त्योहार अत्यंत उपयोगी हैं । त्योहार मानव जीवन में शक्ति का संचार करते हैं । भारत में वर्ष भर में अनेक त्योहार मनाए जाते है । इनमें से कई त्योहारों का संबंध ऋतुओं से होता है तथा कई त्योहार ऐतिहासिक घटनाओं एवं धार्मिक विश्वासों से जुडे हुए होते है । भारत के सभी त्योहारों में से दीपावली सर्वाधिक आकर्षक एवं महत्वपूर्ण त्योहार है ।नामकरण- दीपावली शब्द दीप अवली से मिलकर बना है जिसका अर्थ है दीपों की अवली या पंक्ति या माला । इस त्योहार पर घर-घर पर दीप जलाए जाते हैं, इसलिए इसका नाम दीपावली पड़ा ।मनाने का कारण- यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है । इस त्योहार को मनाने के कई धार्मिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक कारण हैं । इस दिन श्री रामचन्द्र जी चौदह वर्ष का वनवास काटकर तथा रावण को मारकर अयोध्या लौटे थे । अयोध्यावासियों ने उनके आने की खुशी मैं घी के दिए जलाकर उनका स्वागत किया था । तभी सें यह त्योहार प्रतिवर्ष दीप जलाकर मनाया जाता है । इस त्योहार को मनाने के और भी अनेक संदर्भ हैं । एक कथा के अनुसार इस दिन महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ पूरा किया था । जैन धर्म के अनुयायियों के अनुसार इसी दिन जैन मत के प्रवर्त्तक महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था । इसी दिन आर्य समाज के संस्थापक स्वामी सरस्वती दयानंद को भी मोक्ष प्राप्त हुआ था । सिक्ख धर्म के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह जी भी इसी दिन कारागार से मुक्त हुए थे । कृष्ण भक्तों के अनुसार इस दिन से एक दिन पूर्व श्रीकृष्ण ने नरकासुर का व ध किया था तथा इसी दिन श्रीकृष्ण ने ब्रज प्रदेश को इंद्र के कोप से बचाया था । इसी दिन स्वामी रामतीर्थ देह को त्यागकर मुका हो गए थे । इसलिए यह दिन सभी भारतीयों के लिए पुण्य कारक दिन है ।पर्व का आयोजन- दीपावली का त्योहार अपने साथ कई त्योहार लाता है । दीपावली से दो दिन पहले त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाया जाता है । इस दिन लोग नए बर्तन खरीदते हैं । चर्तुदशी को ‘नरक चौदस’ तथा अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है । दीपावली से अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है । इन दिन कृष्णजी ने गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था । द्वितीय को भैया दूज मनाई जाती है ।तैयारियां- दीपावली की तैयारियां दशहरे के बाद से ही प्रारंभ हो जाती है । यह त्योहार वर्षा ऋतु के बाद उगता है । लोग अपने घरों की सफाई, रंग-रोगन शुरू कर देते हैं । व्यापारी वर्ग भी अपनी दुकानों तथा दफ्तरों की सफाई करवाते हैं । बाजारों में खूब चहल-पहल होती है । मिठाई, पटाखे, दीपक, मोमबत्तियां, कपड़े आदि सभी चीजों से बाजार सजे होते हैं । इसी दिन दोपहर को लोग हनुमान जी की पूजा करते हैं क्योंकि वे ही श्री राम जी, लक्ष्मण तथा सीता जी के अयोध्या लौटने का संदेश लेकर आए थे । घरों में भिन्न-भिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते है । रात्रि में घरों पर दीपक से प्रकाश किया जाता है- । दीपावली से कुछ दिन पूर्व ही लोग अपने घरों पर रोशनी से प्रकाश करते है । लोग खील- पताशे, मिठाईयां तथा आतिशबाजियां खरीदते हैं ।आजकल दीपक का स्थान बिजली के बच्चों तथा मोमबत्तियों ने ले लिया है । बच्चे आतिशबाजी चलाकर बहुत प्रसन्न होते हैं । घर में लक्ष्मी-गणेश तथा सरस्वती जी क- पूजा की जाती है । मित्रों तथा संबंधियों को तोहफे तथा मिठाइयां बांटी जाती हैं ।दीपावली की रात को कुछ लोग जुआ खेलते हैं तथा शराब पीते हैं । इस प्रकार वे दीपावली की पवित्रता को भंग करते हैं । उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । जुए के कारण लाखों लोग बर्बाद हो जाते है । इसके अतिरिक्त लोग आतिशबाजियों पर भी हजारों रुपए नष्ट करते हैं । हमें इस प्रकार की बुराइयों एवं फिजूलखर्ची से बचना चाहिए । इस दिन हमें यह निश्चय करना चाहिए कि केवल बाहर का प्रकाश ही नहीं हमें अपने हृदयों में भी सद्‌गुणों का प्रकाश करना चाहिए तथा यह प्रयास करना चाहिए कि इस संसार में जहां कहीं भी गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा एवं बुराईयों का अं धेरा है, दूर हो । हमें कवि की ये पंक्तियां सदा याद रखनी चाहिए-दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन से व्यापारियों के नव वर्ष का आरंभ होता है । वे इस दिन अपना नया बही खाता आरंभ करते हैं । दीपावली की रात बहुत ही सुहावनी लगती है । दीपावली की रात में जलते हुए दीपों की कतारें अंधकार को भगा देती हैं । दीपक अपने जगमगाते प्रकाश से सबको चकाचौंध कर देते है । पंजाब में अमृतसर एवं भारत मैं मुंबई की दीपावली प्रसिद्ध है । अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की शोभा देखते ही बनती है ।ऋतु परिवर्तन से संबंध- इस त्योहार का संबंध ऋतु परिवर्तन से भी है । इस समय से शरद् ऋतु का आरंभ हो जाता है । लोगों के खान-पान एवं पहनावे में भी परिवर्तन आ जाता है । यह त्योहार हमें सद्‌भावना, संपन्नता एवं मेल-मिलाप का संदेश देता है । इसे पवित्रता एवं उचित ढंग से मनाना चाहिए ताकि दुर्घटना न हो एवं चारों ओर खुशियों एवं उल्लास का वातावरण बना रहे । दीपावली की उमंग, पटाखे-मिठाईयों के रंग दीपक जगमगाएं ऐसे, तारे उतर आएँ हों धरती पर जैसे ।नीचे बिना नुक्ते के भी दिवाली के विषय पर एक निबंध दिया गया है:दिवाली (दीपावली या दीपावली या दीपावली) भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। दिवाली का अर्थ है प्रकाश लैंप की पंक्तियां। यह रोशनी का त्योहार है और हर भारतीय इसे खुशी से मनाता है इस त्यौहार के दौरान, लोग अपने घरों और दुकानों को हल्का करते हैं। वे भगवान गणेश की भलाई और समृद्धि और धन और ज्ञान के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं।दीपावली भारत, नेपाल, श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिडाड और टोबैगो में स्कूल की छुट्टियां है और हिंदुओं की महत्वपूर्ण आबादी वाले कई राज्यों में स्कूल की छुट्टी है।यह त्यौहार कार्तिक के हिंदू माह में मनाया जाता है जो अक्टूबर या नवंबर के दौरान कुछ समय के लिए होता है। 14 वर्ष के निर्वासन से भगवान राम की वापसी और राक्षस राक्षस पर उनकी जीत के लिए यह मनाया जाता है। भारत के कई हिस्सों में, दीवाली को लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है और यह भारत में सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। हिन्दू इसे जीवन का उत्सव मानते हैं और इस अवसर का उपयोग परिवार और संबंधों को मजबूत करने के लिए करते हैं। भारत के कुछ हिस्सों में, यह नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। यह न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी मनाया जाता है। दीवाली के दौरान हिंदू भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं.पटाखे जो सल्फर और कागज का उपयोग करते हैं, वे सल्फर डाइऑक्साइड और कोयला को हवा में डाल देते हैं, इसलिए अब फटाके चुप क्षेत्र में प्रतिबंधित हैं यानी अस्पताल, विद्यालय और अदालतों के पास।हिंदुओं ने अपने घरों और दुकानों को उजागर किया, धन और भाग्य की देवी, देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए, उन्हें आगे साल के लिए शुभकामनाएं देने के लिए। कुछ दिनों पहले दिवाली, घरों, भवनों, दुकानों और मंदिरों से पहले दिन, रथटेग पूरी तरह से साफ किया जाता है, सफेद धुलाई और चित्रों, खिलौने और फूलों से सजाया जाता है। दीवाली दिन, लोग इस दिन अमीर कपड़े पहनते हैं, बधाई, उपहार और मिठाई का आदान प्रदान करते हैं।रात में, इमारतों को मिट्टी के दीपक, मोमबत्ती की छड़ियां और बिजली के बल्ब से प्रकाशित किया जाता है। मिठाई और खिलौना की दुकानों के लिए passers- द्वारा आकर्षित करने के लिए सजाया जाता है बाजार और सड़कों भीड़ हैं। लोग अपने परिवारों के लिए मिठाई खरीदते हैं और उन्हें अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को उपहार के रूप में भी भेजते हैं। रात में, धन की देवी देवी लक्ष्मी की मिट्टी के चित्र और चांदी के रुपए के रूप में पूजा की जाती है। लोग मानते हैं कि इस दिन, हिंदू देवी लक्ष्मी केवल उन घरों में प्रवेश करते हैं जो स्वच्छ और सुव्यवस्थित हैं। लोग अपने स्वास्थ्य, धन और समृद्धि के लिए प्रार्थना की पेशकश करते हैं। वे अपने विश्वास में इमारतों में प्रकाश छोड़ देते हैं कि देवी लक्ष्मी को उसके रास्ते खोजने में कोई कठिनाई नहीं मिलेगी।‘दिवाली’ हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दिवाली को दीपावली भी कहा जाता है। हिंदी में ‘दीपावली’ में दीये की एक पंक्ति है।दिवाली रोशनी का त्योहार है यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ‘कार्तिक’ के महीने में गिरता है। दिवाली में लगभग हर घर और सड़क दीपक से सजाया जाता है, और रोशनी।यह तब मनाया जाता है जब 14 वर्ष के निर्वासन के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे। अयोध्या के लोगों ने उन्हें प्रकाश तेल के लैंप के साथ स्वागत किया। यही कारण है कि इसे ‘लाइट्स का महोत्सव’ कहा जाता हैदीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक-दूसरे को बधाई देता है। बच्चे खिलौने और पटाखे खरीदते हैं। दुकानों और घरों को साफ और चित्रित किया गया है रात में लोग लक्ष्मी की पूजा करते हैं-धन की भलाईहमें पूरी आशा है कि आपको हमारा यह article बहुत ही अच्छा लगा होगा. यदि आपको इसमें कोई भी खामी लगे या आप अपना कोई सुझाव देना चाहें तो आप नीचे comment ज़रूर कीजिये. इसके इलावा आप अपना कोई भी विचार हमसे comment के ज़रिये साँझा करना मत भूलिए.

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Essays on diwali in hindi

Hindi Essay on Diwali दीपावली Dipawali Hindi Nibandh ⚝⚝⚝. September 17, 2017 admingeek. दीपावली DIWALI Hindi Essay on Diwali दीपावली. दीपावली भारत में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है । हर साल इस पर्व को हिन्दु कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में बड़ी धूम. प्रकाश के साथ-साथ खुशियों, सफाई और एकता का भी प्रतीक है। यूँ तो यह हिन्दुओं का प्राचीन त्यौहार है, लेकिन सिख, जैन और बौद्ध धर्म में भी इसकी काफी मान्यता है। जैन धर्म के लोग इसे महावीर भगवान के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिखों के लिए यह ‘बंदी छोड़ दिवस’ होता है। इस त्यौहार की मान्यता यह है कि भगवान राम इसी दिन 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ अपनी नगरी अयोध्या पधारे थे और अयोध्या वासियों ने उनके लौटने की ख़ुशी में घी के दिए जलाकर पूरी नगरी को प्रकाश से रौशन कर दिया था। तभी से हर वर्ष हम दीपावली मनाते आ रहे हैं। आती है। ये अधिकतर अक्टूबर या नवम्बर के महीने में ही आती है। इस दिन घरों में सुबह के समय पकवान बनाकर देवी-देवताओं को भोग लगाया जाता है और शाम के समय मुहूर्त देखकर घर की औरतें सभी परिवारजनों के साथ मिलकर लक्ष्मी-पूजन करती हैं, रंगोली बनाती हैं, घर में हर जगह दीप जलाती हैं। बच्चे पटाखे जलाते हैं और बड़े घर-घर में मिठाई बांटते हैं। लेकिन वास्तव में दीपावली मनाता है, क्योंकि लोगों के पास घर लौटने का समय ही नहीं है। नौकरी, बच्चों के स्कूल और खर्चे के कारण लोग अपनों के पास जाना ही नहीं चाहते। ऐसा क्यों ? दूसरी ओर हम जहां मित्रगणों को महंगी-महंगी मिठाई या उपहार बांटते हैं, वहीँ गरीबों का दान हमें इतना महंगा क्यों लगता है, कि हम कहीं कंगाल ही न हो जाएँ ? दीपावली करना आजकल फैशन हो चुका है। लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि केवल किसी एक गरीब या अनाथ बच्चे के जीवन में आप उसकी फीस भरकर और किताबें खरीदकर शिक्षा का प्रकाश भरें। नहीं न! तो अब ज़रूर सोचिये, क्योंकि ऐसा करने से उस बच्चे की मुस्कान आपके जीवन में सुकून की रोशनी लाएगी। 4. घर में, मंदिरों में प्रकाश तो होता है, लेकिन फिर भी मन मैले ही हैं। मन में किसी के लिए द्वेष, किसी के लिए नफरत, किसी के लिए घृणा, किसी से जलन की भावना हमारे मन में इस दिन भी बनी रहती है। You can also read : रक्षाबंधन पर निबंध व रक्षाबंधन का महत्व के दीपों की लौ में जलकर भस्म हो जाए। 5. भगवान राम, सीता माता को रावण से मुक्त कराके अयोध्या लौटे और ये पर्व भी माता लक्ष्मी को ही समर्पित है और पूजा भी घर की लक्ष्मी यानि कि एक औरत ही करती है। लेकिन सदियों से दीपावली है और बलात्कार जैसे भयंकर रोग से पीड़ित होने वाली भी एक लक्ष्मी ही है। आदमी जिसे पैरों की धूल समझे, वो भी लक्ष्मी और बाप जिसे बेटे से कम आंके वो भी एक लक्ष्मी। अंतर्मन में झांको और स्वयं से प्रश्न करो कि कैसी दीपावली घर में जाले साफ़ करना और बाहर पान थूकना, घर में धूप जलाना और बाहर खुले में शौच, घर में बच्चों को बताना कि कूड़ा कूड़ेदान में डालें, लेकिन बाहर उन्हीं के सामने चलती गाड़ी में से कूड़ा फ़ेंक देना। 7.

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Essay on Diwali in English and Hindi - IAS Paper

Essays on diwali in hindi

Essay on Diwali for class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, and 10. Short and Long Paragraphs on Diwali for students and children. दीपावली का अर्थ है - दीपों की पंक्तियां। दीपावली के दिन प्रत्येक घर दीपों की पंक्तियों से शोभायमान रहता है। दीपों, मोमबत्तियों और बिजली की रोशनी से घर का कोना-कोना प्रकाशित हो उठता है। इसलिए दीपावली को रोशनी का पर्व भी कहा जाता है।यह त्योहार अपने साथ ढेरों खुशियां लेकर आता है। एक-दो हफ्ते पूर्व से ही लोग घर, आंगन, मोहल्ले और खलिहान को दुरुस्त करने लगते हैं। बाजार में रंग-रोगन और सफेदी के सामानों की खपत बढ़ जाती है। ठंडे मौसम की हल्की-सी आहट से तन-मन की शीतलता बढ़ जाती है।दीपावली का दिन आने पर घर में खुशी की लहर दौड़ जाती है। बाजार में मिट्‍टी के दीपों, खिलौनों, खील-बताशों और मिठाई की दुकानों पर भीड़ होती है। दुकानदार, व्यापारी अपने बहीखातों की पूजा करते हैं और कई इसी दिन नए ‍वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी करते हैं।संध्या के समय घर-आंगन और बाजार जगमगा उठते हैं। पटाखों की गूंज और फुलझड़ियों के रंगीन प्रकाश से चारों ओर खुशी का वातावरण उपस्थित हो जाता है। घर-घर में पकवान बनाए जाते हैं। बच्चों की स्कूल की छुट्‍टियों से इस त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है।दीपावली के दिन भारत में विभिन्न स्थानों पर मेले लगते हैं। दीपावली एक दिन का पर्व नहीं अपितु पर्वों का समूह है। दशहरे के पश्चात ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती है। लोग नए-नए वस्त्र सिलवाते हैं। दीपावली से दो दिन पूर्व धनतेरस का त्योहार आता है। इस बाजारों में चारों तरफ चहल-पहल दिखाई पड़ती है।बर्तनों की दुकानों पर विशेष साजसज्जा व भीड़ दिखाई देती है। धनतेरस के दिन बरतन खरीदना शुभ माना जाता है अतैव प्रत्येक परिवार अपनी-अपनी आवश्यकता अनुसार कुछ न कुछ खरीदारी करता है। इस दिन तुलसी या घर के द्वार पर एक दीपक जलाया जाता है। इससे अगले दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली होती है। इस दिन यम पूजा हेतु दीपक जलाए जाते हैं।दीपावली का पर्व अकेले भारत में ही धूमधाम से नहीं मनाया जाता बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में दीप पर्व अपनी छटा बिखेरता है। जिन देशों में हिंदुओं और सिखों की बड़ी आबादी है, वहां तो रोशनी का जलसा देखते ही बनता है।श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मॉरीशस, केन्या, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो, नीदरलैंड्स, कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में दीपावली मनाई जाती है।जैसे-जैसे भारतीय प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे दीपावली मनाने वाले देशों की संख्या भी बढ़ रही है। कनाडा के ओंटारियो स्थित मिसिसागा में रहने वाली अंजलि बक्शी ने फोन पर कहा ‘यहां तेज आवाज वाले पटाखे छोड़ने पर रोक है। यहां अलग-अलग केंद्र हैं, जहां हम लोग अपने त्योहार मनाने के लिए एकत्र होते हैं। इस दिन हम अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं और शाम को दीपावली उत्सव के लिए इकट्ठे हो जाते हैं। कई बार तो हमने भारतीय दूतावास में भी दीपावली मनाई है।नेपाल के काठमांडो में पिछले कई सालों से रह रहे अजय कारकी ने फोन पर बताया कि यहां दीपावली को स्वान्ति कहा जाता है। यह पर्व यहां पांच दिन मनाया जाता है। परंपरा वैसी ही है जैसी भारत की है। थोड़ी भिन्नता भी है। पहले दिन कौवे को, दूसरे दिन कुत्ते को भोजन कराया जाता है। लक्ष्मी पूजा तीसरे दिन होती है। इस दिन से नेपाल संवत शुरू होता है इसलिए व्यापारी इसे शुभ दिन मानते हैं। मलेशिया में हिंदू सूर्य कैलेंडर के सातवें माह में दीपावली मनाई जाती है। सिंगापुर में इस दिन सरकारी छुट्टी रहती है। वहां की दीपावली देखकर लगता है जैसे ‘नन्हे भारत’ में दीपावली मनाई जा रही है। वहां ‘हिन्दू एंडाउमेंट बोर्ड ऑफ सिंगापुर’ कई सांस्कृतिक आयोजन करता है।ब्रिटेन में भी दीप पर्व मनाया जाता है और लीसेस्टर में तो बहुत बड़ा आयोजन होता है। अमेरिका में वर्ष 2009 में पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में दीवाली का परंपरागत दीया जलाया था।यह दीपावली या Dipawali कहा जाता है यह दीवाली, एक हिंदू त्योहार है. यह 14 निर्वासन के वर्ष और राक्षस रावण पर विजय से भगवान राम की वापसी चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है. .इस त्योहार अक्टूबर या नवंबर महीने के दौरान कुछ समय गिर जाता है जो कार्तिक के हिंदू महीने में मनाया जाता है. इस त्योहार के दौरान लोग गणेश, भगवान और लक्ष्मी, प्रकाश, ज्ञान और भाग्य की देवी की हाथी की अध्यक्षता में प्रतिनिधित्व पूजा करते हैं. इस त्योहार में लोग अपने घरों और दुकानों को प्रकाशकरते हैं. भारत दीवाली के कई हिस्सों में लगातार पांच दिनों के लिए मनाया जाता है और भारत में सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है. हिंदुओं को समान रूप से जीवन का एक उत्सव के रूप में मानते हैं और परिवार और रिश्तों को मजबूत करने के लिए इस अवसर का उपयोग करें.

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दीवाली पर निबंध हिंदी में दिवाली का महत्व, फायदे.

Essays on diwali in hindi

Essay On Diwali /Deepawali Festival In Hindi पेश किये हैं इस निबंध को हम बहुत ही कम शब्दों में और बिलकुल सरल भाषा में पेश किये हैं जिसको बच्चे आराम से पढ़. दिवाली त्योहार का आनंद लेने के लिए कुछ दिन की छुट्टी दी जाती हैं लेकिन कई स्कूलों में दिवाली के समय एक छोटासा होमवर्क भी देते हैं। और यह होमवर्क बच्चे ख़ुशी ख़ुशी करते भी हैं। वो होमवर्क हैं दिवाली पर निबंध लिखना। आज कल के बच्चों को दीवाली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए बच्चों को समझने के लिए और दिवाली पर निबंध – Essay on Diwali लिखने के लिए इस निबंध के ज़रिये हम आपकी थोड़ी मदत कर देते हैं। भारत में साल भर बहुत से त्योहार मनाये जाते हैं, जहां सभी धर्मों के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा के अनुसार अपने विभिन्न त्योहारों का जश्न मनाते हैं। “दिवाली” हिन्दू धर्म के लोगों का सबसे मशहूर, महत्वपूर्ण, पारंपरिक और सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है, जो हर साल रिश्तेदारों, परिवार, मित्रों और पड़ोसियों के साथ मिलकर बहुत उत्साह से मनाते हैं। यह रोशनी का त्योहार या दीपावली के रूप में भी जाना जाता है। यह त्योहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ‘कार्तिक’ के महीने में मतलब अक्तूबर या नवम्बर के महीने में आता है। दिवाली में हर घर में दीपक से सजाये जाते है। दीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक -दूसरे को बधाई देता है। दिवाली त्यौहार धनत्रयोदशी यानि धन तेर के साथ शुरू होता है, और नरक चतुर्दशी,लक्ष्मी पूजा (दिवाली), गोवर्धन पूजा और भाईदूज के साथ खतम होता हैं। भारत में हर त्यौहार और उत्सव किसी कारण या एक किंवदंती के साथ जुड़ा हुआ है वैसे ही इस त्यौहार के पीछे भी एक कहानी हैं दीवाली का त्यौहार भगवान् श्रीराम अपने 14 वर्ष के वनवास को पूरा करने के बाद, अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य अयोध्या को वापसी की याद दिलाता है। अयोध्या के लोगों ने मिट्टी के दियें लगाकर राज्य को रोशन करके अपने राजा का स्वागत किया। दीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक-दूसरे को बधाई देता है। बच्चे खिलौने और पटाखे खरीदते हैं। दीवाली के कुछ दिन पहले दिवाली के लिए लोग अपने घरों, दुकानों को सफाई और चित्रित करते हैं। वे इस अवसर पर नए कपड़े, उपहार, बर्तन, मिठाई आदि खरीदते हैं। इसे नई दुकानों, घर, व्यवसाय और साझेदारी आदि के उद्घाटन के शुभ अवसर माना जाता है। धन तेरस – Dhanteras धन तेरस को घर के लिए कोई वस्तु, और सोने, चांदी आदि खरीदने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है। लोग इस दिन को नए व्यापार शुरू करने के लिए शुभ मानते हैं। नरक चतुर्दशी – Narak Chaturdashi इस दिन था जिस पर राक्षस नरकासुर भगवान कृष्ण द्वारा मारा गया था जो कि अंधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। लक्ष्मी पूजा – Lakshmi Pooja लक्ष्मी पूजा यह दिन दिवाली का महत्वपूर्ण दिन माना जाता हैं इस दिन रंगोली और दियें की रोशनी के साथ घर और मंदिर को सजाकर लोग अपने घरों और दुकानों और व्यावसायिक स्थानों पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा शाम को करते हैं। लक्ष्मी धन की देवी है और गणेश को शुभ शुरुआत के देवता के रूप में माना जाता है। लोग सड़कों, बाजारों, घरों और परिवेश में समृद्धि और कल्याण की इच्छा के लिए तेल से भरे प्रकाश की मिट्टी के साथ दिवाली का स्वागत करते हैं। इस अवसर पर पटाखे मुख्य आकर्षण हैं। पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों को घरों और मिठाई वितरण में पकाया स्वादिष्ट भोजन दिवाली उत्सव का हिस्सा हैं। दिवाली की रात को लोग अपने घरों के दरवाजे खुल गए क्योंकि वे देवी लक्ष्मी की यात्रा की उम्मीद करते हैं। गोवर्धन पूजा और बलिप्रतिपदा – Govardhan Puja / Balipratipada इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र को पराजित किया और इंद्र द्वारा आयोजित भारी बारिश से अपने ग्रामीणों और मवेशियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया। उत्तर भारत में गोबर, गन्ने, किताबें, हथियार और उपकरण आदि इस अवसर पर शाम को पूजा करते थे। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में लोग इस दिन बलिप्रतिपदा के रूप में मनाते हैं जो दानव राजा बाली के ऊपर विष्णु के बौना वामन अवतार की विजय का स्मरण करता है। भाईदूज – Bhai Dooj भाईदूज त्योहार भाई और बहन के स्नेह का प्रतीक है। बहन अपने भाई को तिलक और नारियल और मिठाई की पेशकश करती है जहां भाई अपनी बहन को उपहार देता है। दीवाली के अवसर पर हर समुदाय और उम्र के लोगों में उत्साह से भरा होता है। विभिन्न संस्कृतियों द्वारा उसी त्यौहार के उत्सव के विभिन्न तरीकों से और अधिक सुंदर बना दिया जाता है। स्कूल, कॉलेज में कुछ दिनों की छुट्टिया दी जाती हैं ताकि बच्चे त्योहार का आनंद उठा सकें। बैंक नई योजनाएं और ब्याज दरों की पेशकश करते हैं हर साल इस अवसर पर भारी बजट नई फिल्में जारी की जाती हैं। Read: More Essay Collection: Essay in Hindi Hope you find this post about ”Essay on Diwali” useful. if you like this Article please share on Facebook & Whatsapp. and for latest update download: Gyani Pandit free Android app.

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दीपावली पर निबंध हिंदी में: Essay on Diwali in Hindi in 250 Words

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Diwali Essay दीपावली पर निबन्ध के लिए Essay on Diwali In Hindi इस पेज को पढ़े, यहाँ. * Bootstrap v3.3.6 ( * Copyright 2011-2015 Twitter, Inc. * Licensed under MIT (https://github.com/twbs/bootstrap/blob/master/LICENSE) */ /*!

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Hindi Essay On Diwali Or 'Deepawali' - Best - - AchhiGyan. Com

Essays on diwali in hindi

Hindi Essay On Diwali, Hindi Essay Deepawali Hindi language, Hindi Essay On Diwali For All Class, 'दीपावली' दिवाली पर निबंध. तिहार, Hindi: दिवाली, Gujarati: દિવાળી, Marathi: दिवाळी, Kannada: ದೀಪಾವಳಿ, Konkaniधाकली दिवाळी, Malayalam: ദീപാവലി, Oriya: ଦୀପାବଳୀ, Punjabi: ਦਿਵਾਲੀ, Telugu: దీపావళి) (also spelt Devali in certain regions) , popularly known as the "festival of lights," is a five-day Hindu festival[3] which starts on Dhanteras, celebrated on the thirteenth lunar day of Krishna paksha (dark fortnight) of the Hindu calendar month Ashwin and ends on Bhaubeej... By: Datcayani Three Days Of Diwali Deepavali is a festival of joy, splendor, brightness, happiness and a festival celebrated with light . It is the festival of lights and is celebrated with great enthusiasm by all Indians all over the world. The uniqueness of this festival is its harmony of five varied philosophies, with each... I buy new pairs of clothes and buy lots of fireworks(best part of Diwali)I paint my house, buy lots of gifts and distribute it amongst my loved ones and start bursting crackers 10 days before!! Alok Rai who is also known as a critical thinker, theorist and also the grandson of Premchand makes his readers aware of the process of modernization in the case of language. On Diwali day I get up early bathe my self and have some delicious "PENNY"(traditional sweet of Diwali) and perform Lakshmi Pooja. In this essay we get to witness a connection between Hindi (old Hindi) and “Hindi” (new Hindi).

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Essay in hindi language : Essay on diwali in hindi.

Essays on diwali in hindi

Short Essay On Diwali In Hindi Language. दीपावली भारत में मनाया जाने वाला एक ऐसा त्योहार है जिसका धार्मिक ही नहीं सामाजिक महत्त्व भी अत्यधिक है वैसे तो यह हिंदुओं का पर्व है, किन्तु इसे अब प्रायः भारत में हर धर्म. Posted: , Author: Uxofados 1 Diwali Special 2 Hindi Essay On 'diwali' ' Diwali- A Festival Of Light 3 Essay On Diwali Festival In Marathi 4 Diwali Festival Essay In Marathi Language 5 Diwali Essay In Hindi 200 Words 6 Diwali Padwa In Marathi Balipratipada Information In Marathi. Deutsche bank diversity essay for medical school mevastatin synthesis essay paris city of love description essay anecdote of the jar critical analysis essay essaying. Smekens compare contrast essay women and film essays van inwagen difference thesis and dissertation ucf admissions essays dystopian literature essay doctrine. You can t ask a clinical psychologist for a tip i m either going to give you questions to reflect on or a research paper with. Diwali Essay In Marathi Language diwali essay in marathi language Essays in Marathi. We guarantee you original papers on time, a money back guarantee, and total confidentiality. I ve medical school secondary application essay questions had with other writers about personal essays. In addition, considering the abundance of data on the worldwide web, you cant always be write my english paper sure of information's authenticity.

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Essay on Diwali in Hindi - दिवाली पर निबंध

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Essay on Diwali in Hindi Language - Essays in Hindi

Essays on diwali in hindi

Here is a compilation of Essays on 'Diwali' for students of the class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12 as well as for teachers. Find paragraphs, long and short essays on 'Diwali' Hindu Festival especially written for Teachers and School Students in Hindi Language. दीपावली भारत में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है । हर साल इस पर्व को हिन्दु कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इस त्योहार के आने के कुछ दिन पहले ही इसकी तैयारी आरंभ हो जाती है । लोग अपने घरो में साफ़-सफाई और रंग-रोगन का काम आरंभ कर देते है। इस दिन घरो और बाजारों को खूब सजाया जाता है। कई लोग घरो में रंगोली बनाते है। इस दिन सब लोग अपने निजी सखे-सम्बन्धियों को उपहार देते है। बच्चे नए-नए वस्त्र पहनते है। इस दिन घरो में तरह-तरह के पकवान बनते है। रात को सब लोग लक्ष्मी पूजन करके पठाके चलाते है। इस दिन पुरे गाँव-शहर, गली-सड़के सब दीपक से रोशन किए जाते है। Diwali त्योहार को क्यों मनाया जाता है?

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Popular Festivals Essay in Hindi - प्रसिद्ध त्योहार निबंध - Hindi Vidya

Essays on diwali in hindi

Essay on diwali in hindi in 250 words diwali par nibandh दीपावली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है. दीपावली के दिन हर घर दीपों की रौशनी से जगमगा उठता है. दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं. दीपावली से पहले सारे बाजार दीपावली के सामानों. Hello, students and Teachers, I am Sanaullah Farooq Click Here to meet on Facebook.

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Essay on “Diwali-Festival of lights” in Hindi. Article shared by. Read this essay specially written for you on “Diwali-Festival of lights” in Hindi Language. 0020027. Home ››. Feel the spirit of Raksha Bandhan festival with these beautiful essays on Rakhi contributed by our visitors! You may also exhibit love for your sibling by sending your reflections on Raksha Bandhan festival or a short paragraph on Rakhi. Your Raksha Bandhan essay will be posted on this website with due acknowledgment to you. Rakhi is a sacred thread embellished with sister's love and affection for her brother. On the day of Raksha Bandhan, sisters tie rakhi on the wrists of their brothers and express their love to them. After receiving the rakhi from a sister, a brother sincerely takes the responsibility of protecting her sister. In Indian tradition, the frangible thread of rakhi is considered even stronger than an iron chain as it strongly binds a brothers and a sisters in the circumference of mutual love and trust. Any Indian festival seems to be incomplete without the traditional Indian festivities, such as gathering, celebrations, exchange of sweets and gifts, lots of noise, singing and dancing.

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Diwali Essay in Hindi - दीवाली(दीपावली) पर निबंध

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Hindi Essay on Diwali - Term Paper

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